वरोरा : माढा रोडवरील जिनिंगमध्ये भीषण आग; ८ ते १० कोटींचा कापूस जळून खाक

वरोरा : माढा रोडवरील जिनिंगमध्ये भीषण आग; ८ ते १० कोटींचा कापूस जळून खाक दुपारी कापूस टाकताना दुर्घटना; अर्ध्या तासात १० हजार क्विंटल माल राखेत रवीकमल कोटेक्स जिनिंग  येथील घटना  वरोरा .13/4/26: वरोरा तालुक्यापासून तीन ते चार किलोमीटर अंतरावर असलेल्या मार्डा रोडवरील रवीकमल कोटेक्स कापूस जिनिंग प्रकल्पात सोमवारी दुपारी चार वाजताच्या सुमारास भीषण आग लागली. जिनिंग मधील कापूस डोजरद्वारे टाकत असताना ही आग लागल्याचा प्राथमिक अंदाज वर्तवण्यात आला आहे. या दुर्घटनेत तब्बल ८ ते १० हजार क्विंटल कापूस जळून खाक झाला असून, सुमारे ८ ते १० कोटी रुपयांचे नुकसान झाल्याचा प्राथमिक अंदाज आहे. घटनेच्या वेळी परिसरात मोठ्या प्रमाणात कामगार कार्यरत होते. गोदामात कापसाच्या गाठी व बाहेर ट्रक भरून कापसाच्या गाठी लोड करून होत्या. इथपर्यंत अग्निशामक दलाने आग पोहोचू दिली नाही.  आगीने पाहता पाहता रौद्ररूप धारण केले आणि अवघ्या अर्ध्या तासाच्या आतच परिसरातील हजारो क्विंटल कापूस राखरांगोळा झाला. या आगीत कापसासोबतच डोजर ट्रॅक्टर आणि इतर साहित्यही भस्मसात झाले. यानंतर अग्निशमन दलाच्या आठ गाड्या ...

इकोप्रो द्वारा बर्डवाचिंग और जागरूकता अभियान

इकोप्रो द्वारा बर्डवाचिंग और जागरूकता अभियान

भद्रावती : पद्म भूषण डॉक्टर सलीम अली और साथ ही पक्षी संरक्षण के लिए अपने बहुमूल्य कार्य के लिए सेवानिवृत्त वन अधिकारी श्री मारुति चितमपल्ली के जन्मदिन को चिह्नित करने के लिए 5 से 12 नवंबर तक पक्षी सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इसी कारण से इको-प्रो भद्रावती द्वारा बर्ड वीक मनाया जा रहा है। इस दौरान शहर के पास और तालुक में कुछ पक्षियों के लिए पक्षी निगरानी और जन जागरूकता की जाएगी। दिनांक 5 नवंबर को घोड़पेठ झील, 6 नवंबर ला दुधाळा और लोडारा झीलें, दिनांक 7 नवंबर को चिंतामणि तलाव, दिनांक 8 नवंबर को मल्हारा तलाव, दि.9 नवंबर, ला विजासन तलाव, दिनांक 10 नवंबर को घोट- निम्बाला झील, 11 नवंबर को डोलारा झील और 12 नवंबर ला गौराळा झील पर प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8.30 बजे तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया है।बर्ड वॉचिंग के साथ-साथ प्रकृति में पक्षियों के महत्व, लुप्तप्राय पक्षियों और उनके आवासों का संरक्षण, प्रवासी पक्षियों के आवासों की सुरक्षा के साथ-साथ पक्षी संरक्षण और संरक्षण कानूनों की जानकारी आम जनता को दी जाएंगी। ठंड (सर्दी) शुरू होते ही अलग-अलग क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी आ जाते हैं। साल भर छिपे इन रंगीन पक्षियों को देखने, अध्ययन करने और संरक्षित करने का यह एक सुनहरा अवसर है। स्थानीय पार्टी के साथ-साथ इन यात्रा दलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय नागरिकों की होती है, इसलिए इको-प्रो छात्रों, सामाजिक संगठनों, पक्षी विज्ञानियों के साथ-साथ आम नागरिकों से पिछले साल की तरह बड़ी संख्या में इस गतिविधि में भाग लेने की अपील कर रहा है।

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