वरोऱ्यात पुस्तक विक्रीसाठी ‘सेटिंग’ ? विद्यार्थ्यांना शाळेचा नवीन सेट घेणे बंधनकारक.शिक्षणाधिकाऱ्यामार्फत जिल्हाधिकाऱ्यांकडे तक्रार दाखल .

वरोऱ्यात पुस्तक विक्रीसाठी ‘सेटिंग’ ? विद्यार्थ्यांना शाळेचा नवीन सेट घेणे बंधनकारक. शिक्षणाधिकाऱ्यामार्फत जिल्हाधिकाऱ्यांकडे तक्रार दाखल . वरोरा, ता. 30 (प्रतिनिधी): वरोरा येथील सेंट ॲनिस हायस्कूल प्रशासनावर पुस्तक विक्रीत नफेखोरीचा गंभीर आरोप होत असून, स्थानिक पुस्तक विक्रेत्यांना डावलून बाहेरील विक्रेत्याला प्राधान्य दिल्याचा प्रकार उघडकीस आला आहे. या विरोधात शहरातील स्थानिक पुस्तक विक्रेत्यांनी गुरुवार, दि. ३० एप्रिल रोजी एकत्र येत गट शिक्षणाधिकाऱ्यामार्फत जिल्हाधिकाऱ्यांकडे तक्रार दाखल केली आहे. माहितीनुसार, सेंट ॲनिस शाळा प्रशासन यापूर्वीही विविध कारणांमुळे चर्चेत राहिले आहे. काही दिवसांपूर्वी शाळेमधूनच पाठ्यपुस्तके व शैक्षणिक साहित्य विक्री होत असल्याचा आरोप झाला होता. यानंतरही प्रशासनाने अप्रत्यक्ष मार्गाने पुस्तक विक्री सुरूच ठेवल्याचा आरोप स्थानिकांकडून केला जात आहे. विद्यार्थ्यांचे निकाल जाहीर झाल्यानंतर शाळेकडून पालकांच्या व्हॉट्सॲप ग्रुपवर “पुस्तके बाजारात उपलब्ध आहेत” असा संदेश पाठविण्यात आला. मात्र प्रत्यक्षात शहरातील कोणत्याही पुस्तक विक्रेत्याकडे संबंधित या...

इकोप्रो द्वारा बर्डवाचिंग और जागरूकता अभियान

इकोप्रो द्वारा बर्डवाचिंग और जागरूकता अभियान

भद्रावती : पद्म भूषण डॉक्टर सलीम अली और साथ ही पक्षी संरक्षण के लिए अपने बहुमूल्य कार्य के लिए सेवानिवृत्त वन अधिकारी श्री मारुति चितमपल्ली के जन्मदिन को चिह्नित करने के लिए 5 से 12 नवंबर तक पक्षी सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इसी कारण से इको-प्रो भद्रावती द्वारा बर्ड वीक मनाया जा रहा है। इस दौरान शहर के पास और तालुक में कुछ पक्षियों के लिए पक्षी निगरानी और जन जागरूकता की जाएगी। दिनांक 5 नवंबर को घोड़पेठ झील, 6 नवंबर ला दुधाळा और लोडारा झीलें, दिनांक 7 नवंबर को चिंतामणि तलाव, दिनांक 8 नवंबर को मल्हारा तलाव, दि.9 नवंबर, ला विजासन तलाव, दिनांक 10 नवंबर को घोट- निम्बाला झील, 11 नवंबर को डोलारा झील और 12 नवंबर ला गौराळा झील पर प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8.30 बजे तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया है।बर्ड वॉचिंग के साथ-साथ प्रकृति में पक्षियों के महत्व, लुप्तप्राय पक्षियों और उनके आवासों का संरक्षण, प्रवासी पक्षियों के आवासों की सुरक्षा के साथ-साथ पक्षी संरक्षण और संरक्षण कानूनों की जानकारी आम जनता को दी जाएंगी। ठंड (सर्दी) शुरू होते ही अलग-अलग क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी आ जाते हैं। साल भर छिपे इन रंगीन पक्षियों को देखने, अध्ययन करने और संरक्षित करने का यह एक सुनहरा अवसर है। स्थानीय पार्टी के साथ-साथ इन यात्रा दलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय नागरिकों की होती है, इसलिए इको-प्रो छात्रों, सामाजिक संगठनों, पक्षी विज्ञानियों के साथ-साथ आम नागरिकों से पिछले साल की तरह बड़ी संख्या में इस गतिविधि में भाग लेने की अपील कर रहा है।

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